स्कूल खुलने से जूनियर छात्रों में काफी उत्साह, कोरोना को लेकर बंद थे स्कूल-कॉलेज.

कोरोना की वजह से महीनों से बंद रहे स्कूल एवं अन्य शिक्षण संस्थान में सबसे ज्यादा असर जूनियर क्लास के बच्चों पर हुआ है. बिहार में सोमवार यानि 25 अक्टूबर से जब स्कुल की घंटी बजी तो बच्चों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी. सभी बच्चे समय से पहले ही तैयार होकर स्कुल पहुँच गये. हालांकि कोविड प्रोटोकॉल का स्कुल प्रबंधन के तरफ से पूरी तरह पालन कराया गया. सभी बच्चे मास्क पहनकर ही स्कुल के अंदर प्रवेश कराया गया साथ ही स्कुल बैग में एक मास्क एक्स्ट्रा और सेनेटाइज़र स्कुल बैग में रखना होगा. 

बच्चे स्कूल पहुंचे तो प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग हुई और कक्षाओं में सोशल डिस्टेंस का पालन कराया गया. कोरोना काल के बाद मंगलवार को जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो उनका शिक्षकों, कर्मचारियों ने स्वागत किया. जितनी खुशी बच्चों को स्कूल पहुंचने की थी उतनी ही खुशी शिक्षकों को थी. निजी स्कूलों में पहले दिन अनेक स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ अभिभावक भी पहुंचे. बसों में चढ़ने से पहले बच्चों के हाथों को सैनिटाइज कराया गया.

कोरोना काल के कारण जिले में कापी-किताब का व्यवसाय एक दम से ठप पड़ गया था. आलम यह रहा कि जिले के कई कापी किताब की दुकान बंद हो गए, लेकिन अब स्कूलों के खुलने के आदेश आते ही कापी किताब की डिमांड बढ़ गई. बच्चों के साथ अभिभावकों को भी स्कूल खुलने की सूचना पर काफी खुशी है. बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जरुरतमंद समानों की खरीदारी बच्चों के साथ लेकर मार्केङ्क्षटग करा रहे है. इसके अलावा पढ़ाई से जुड़ी वस्तु बैग,जूता, ड्रेस व अन्य समानों की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है.

जिला पदाधिकारी के निर्देश पर जिले भर के सभी स्कूलों की जांच पड़ताल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है. बता दे कि शिक्षा विभाग के द्वारा जांच निरीक्षण के लिए अधिकारी व कर्मचारी तैनात कर खुलने वाले सभी स्कूलों का जायजा भी लिया है.

रिपोर्ट: बिक्रांत रॉय 

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