बिहार को विशेष दर्जा की मांग को छोड़ने की घोषणा भाजपा के सामने जदयू का आत्मसमर्पण-C.P.I. (M)

नीतीश कुमार तमाम अपमान सहकर सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने के लिए राजग गठबंधन के साथ हैं. यह आरोप CPIM के राज्य सचिव अवधेश कुमार ने लगाया है.प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार एवं विकास की लम्बी-चौड़ी बातों के बीच बिहार सरकार के योजना एवं विकास मंत्री बिजेन्द्र यादव द्वारा बिहार को ‘‘विशेष दर्जा’’ की माँग को छोड़ने की घोषणा और राज्य के लिये विशेष आर्थिक पैकेज की माँग ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अन्दर जद(यू) की औकात बताने का काम किया है. इसके पूर्व प्रधानमंत्री के सामने नीतीश कुमार द्वारा बार-बार हाथ जोड़कर ‘‘पटना विश्वविद्यालय ’’ को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग का हस्र हम देख चुके हैं.

जद(यू) के एक मात्र नेता नीतीश कुमार तमाम अपमान सहकर सिर्फ अपनी गद्दी बचाने के लिये राजग गठबंधन से जुड़े हुए हैं. जद(यू) एवं नीतीश कुमार द्वारा उठाये गये तमाम राजनैतिक मुद्दों के प्रति केन्द्र की मोदी सरकार का रुख तिरस्कार पूर्ण है। खींझ और अपनी कमजोरी छिपाने के लिये जद(यू) के प्रमुख मंत्री बिजेन्द्र यादव ने नीति आयोग द्वारा राज्य के विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मानदंडों पर जारी रिपोर्ट को भेदभावपूर्ण बताया है और अपने तरफ से विकास की गुलाबी तस्वीर पेश करने की कोशिश की है.

बिहार के लोगों को जमीनी सच्चाई का पता है. चाहे जल-नल, जल-जीवन हरियाली, मनरेगा, शौचालय निर्माण आदि योजनाओं का कार्यान्वयन हो या बाढ़ राहत, इन तमाम योजनाओं को लागू करने में भयंकर भ्रष्टाचार एवं सरकारी पैसों की लूट होती रही है, जिसके संरक्षक सत्ता में बैठे लोग हैं. अतः आंकड़ों की चालबाजी से बिहार की दर्दनाक सच्चाई पर पर्दा नहीं डाला जा सकता है. पार्टी ने बिहार को विशेष दर्जा दिये जाने की माँग का लगातार समर्थन किया है और आज भी हम इस माँग के साथ खड़े हैं. बिहार को न सिर्फ अधिक संसाधन की जरूरत है बल्कि एक जनपक्षी प्रशासन की भी आवश्यकता है. पार्टी बिहार की आम जनता से जद(यू)-भाजपा की जनविरोधी साम्प्रदायिक सरकार के खिलाफ जन संघर्ष तेज करने का आह्वान करती है.

रिपोर्ट: बिक्रांत रॉय 

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