बिहार : भागलपुर के पीरपैंती में संयोगवश देखने को मिला ‘ओल का फूल’.

रिपोर्ट : नीरज कुमार

भागलपुर के पीरपैती के पूर्व विधायक शोभाकांत मंडल के खेत में ओल का फूल मिला है. यह फूल बहुत ही कम देखने को लोगों को मिलता है. ओल को जब मिट्टी के अंदर बोया जाता है, तब ओल का पौधा आता है. ओल का पौधा का बोने का समय मुख्यतः मई-जून महीना माना जाता है, इसके उपरांत बारिश होती है. जिसके कारण पौधा को उगाने में मदद मिलती है, ओल में फूल 5 वर्ष के उपरांत ही होता है. लेकिन लोग 5 वर्ष का इंतजार नहीं कर पाते क्योंकि जब ओल में फूल आ जाता है, तो उसे बनाकर खाने में वह स्वाधीन हो जाता है और जब तक नहीं फूल होता हैं, तब तक उसमें स्वाद भरपूर रहता है. “ओल का फूल” कुछ बीमारियों के औषधि बनाने में भी काम में लाया जाता है. ओल का फल का चढ़ावा मां दुर्गा को भी किया जाता है. ओल का अचार तथा खाने के भोजन के सब्जी तथा चोखा में भी उपयोग किया जाता है. अभी भी हमारे देश में बहुत से ऐसे लोग मौजूद हैं जो कि मां दुर्गा पर चढ़ावा चढ़ाने के उपरांत ही ओल का फल खाते हैं. ओल का पौधा के लिए कोई उपयुक्त मिट्टी की जरूरत नहीं होती यह किसी भी प्रकार की मिट्टी में उग जाते हैं.

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